07/03/16 19:57:09: S P R A: पूर्वांचल में फिर शुरू होगा गैंगवार का दौर, क्योंकि...
जरायम की दुनिया के गढ़ के रूप में चर्चित यूपी में अब एक और पुरानी रंजिश ने दस्तक दे दी है। गोलियों की तड़तड़ाहट ने उस गैंगवार की दस्तक दी है जो कई साल पहले खामोश हो गई थी। इस बार निशाने पर बदमाशों ने मुन्ना बजरंजी के साले पुष्पेन्द्र सिंह को रखा है, लेकिन इस हत्याकांड के बाद जरायम की दुनिया में एक बार फिर से गैंगवार अपना पैर फैला रहा है।
क्या है मामला
यूपी में 1984 में चौबेपुर के पास धौरहरा में खून का संबंध रखने वाले दो परिवार के बीच खून बहा। एक मर्डर भी हुआ। तब किसी ने ये सोचा ही नहीं था कि ये मर्डर भी न था कि ये मर्डर पूर्वांचल की क्राइम हिस्ट्री का एक चैप्टर बन जाएगा। बात पुरानी और कहानी सी लगती है, मगर हाल ही में लखनऊ में हुई मुन्ना बजरंगी के साले की हत्या की वारदात ने ये साबित कर दिया कि चैप्टर अभी खत्म नहीं हुआ है इसमें और पन्ने जुड़ने बांकी है, क्योंकि गैंगवार चालू है। बृजेश सिंह और इन्द्रदेव उर्फ बीकेडी के बीच दुश्मनी बहुत पुरानी है या यूं कहें कि इसी दुश्मनी का नतीजा है कि अपने वक्त का सीधा साधा बृजेश सिंह माफिया डॉन बन गया। अगस्त 1984 को धौरहरा में बृजेश सिंह के पिता रवीन्द्रनाथ उर्फ भूलन सिंह की हत्या कर दी गई थी। इस हत्या को अंजाम देने वालों में बीकेडी के पिता हरिहर सिंह, लुल्लुर सिंह और पांचू सिंह थे। पिता की हत्या के बाद ही पढ़ने लिखने में होनहार रहा बृजेश जरायम की दुनिया में दाखिल हुआ और मई 1985 में उसने अपने पिता की हत्या में शामिल बीकेडी के पिता हरिहर सिंह को गोली मारकर मौत की नींद सुला दिया। ये बृजेश के हाथों हुआ पहला अपराध था। इसके बाद बृजेश ने अपने पिता के हत्यारों को चुन-चुनकर मारना शुरू किया और 1989 में बीकेडी के चाचा प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ झगडू की चकबंदी दफ्तर के पास हत्या करने के बाद हरीहर के भतीजे राजीव को भी गोली मार दी गई। इसके बाद भी मौत का ये खेल नहीं थमा और 1991 में कचहरी परिसर में मायाशंकर पर हुए हमले में बृजेश और उसके चचेरे भाई सतीश का नाम सामने आया।
कोयला, शराब और रेलवे के स्क्रैप को लेकर भी अब मुख्तार अंसारी और ब्रजेश सिंह में रोजाना ही जंग होने लगी है जिसमें रोज कोई न कोई गैंग का व्यक्ति अपनी जान गंवा देता था। इसके बाद ब्रजेश सिंह के बढ़ते कद को रोकने के लिए बीकेडी मुख्तार गैंग में पूरी तरह से शामिल हो गया। ऐसे में ब्रिजेश सिंह ने भी मौके की नजाकत को देखते हुए कृष्णानंद राय से अपनी नजदीकियां बढ़ा ली जिसका नतीजा ये हुआ की ब्रजेश गैंग हावी हो गया। इस दौरान 1995 में पुलिस ने बीकेडी के भाई पांचू का एनकाउंटर कर दिया। इसी साल में बीकेडी के रिश्तेदार शिव सिंह और इसी के एक साल बाद बीकेडी के ताऊ बनारसी सिंह को भी बृजेश सिंह गैंग ने मौत के घाट उतार दिया और अपने भाई चुलबुल सिंह को राजनीति में खड़ा कर दिया, लेकिन इसी दौरान 29 नवम्बर 2005 को गाजीपुर-बलिया बॉर्डर पर भांवरकोल थाना इलाके में बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय समेत 7 लोगों की हत्या ने ब्रजेश गैंग को पूरी तरह से तोड़ दिया और पूर्वांचल में मुख्तार गैंग हावी हो गया। इसमें मुख्तार का पूरा साथ दिया मुन्ना बजरंजी ने और दोनों के बीच नज़दीकियां बढ़ गई।
इसके ठीक एक महीने बाद ब्रजेश सिंह ने मुख्तार अंसारी और उनके भाई अफजल अंसारी पर गाजीपुर के आरकेबी के पेट्रोल पम्प पर एक साथ तबातोड़ फयरिंग की, लेकिन अफजल अंसारी ने खुद को तो बचाया ही साथ ही अपने भाई मुख्तार अंसारी को भी सुरक्षित बचा ले गया। इस घटना से बौखलाये मुख्तार अंसारी ने ब्रजेश सिंह के काफिले पर लखनऊ के कैंट इलाके में फायरिंग की, जिसमें ब्रिजेश सिंह की गोली लगने से मौत की खबर प्रसारित की गई। जिससे ऐसा लगा कि पूर्वांचल में गैंगवार अब थम गई है, लेकिन कुछ समय बाद ब्रजेश सिंह को भुवनेश्वर से दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने गिरफ्तार कर लिया। जिससे ये साबित हो गया की जानबूझकर ये बात फैलाई गई थी, क्योंकि इसी दौरान ब्रजेश सिंह के सगे भतीजे सुशील सिंह को बहुजन समाज पार्टी से धानापुर (चंदौली) विधानसभा से विधायक का टिकट मिला था और उसमें उसकी जीत हो गई। इसके बाद बहुजन समाज पार्टी के कार्यकाल के दौरान 5 सालों तक पूर्वांचल की खून से लाल नहीं हुई, लेकिन यूपी में सपा सरकार आते ही मुन्ना बजरंगी और मुख्तार अंसारी ने मिलकर जरायम की दुनिया में बादशाहत कायम करने की कोशिश की, जिसमें ब्रजेश सिंह के लोगों को मारा जाने लगा। इसकी वजह से कांग्रेसी विधायक अजय राय से बृजेश सिंह की नजदीकियां बढ़ने लगी।
बता दें कि जरायम की दुनिया में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि आपसी वर्चस्व की लडाई में अंधाधुंध गोलियां चली है इससे पहले भी कई बार हौसला बुलंद अपराधियों ने ऐसे वारदातों को अंजाम दिया है, लेकिन जिस तरह से पूर्वांचल के माफिया डॉन के करीबियों के ऊपर जान लेवा हमले हो रहे थे इससे तो साफ यही माना जा रहा था कि अब विरोधी गुट ब्रजेश गैंग का सफाया करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रहा है। अब तो मुख्तार गैंग के लोग पूर्वांचल में किसी और गैंग का वर्चस्व नहीं देखना पसंद कर रहे हैं। ऐसे में बृजेश सिंह ने एमएलसी चुनाव जीतकर अपना वर्चस्व कायम करने की कवायद शुरू कर दी और यही वजह है की लखनऊ में मुन्ना बजरंजी के साले की हत्या में कृष्णा नन्द राय के रिश्तेदारों के नाम एफआईआर दर्ज होना ये साफ कर रहा है कि बृजेश सिंह के बढ़ते कद ने सालों से दबे हुए कृष्णा नन्द राय की हत्या के मामले को हवा दे दी है।
उत्तर प्रदेश में इससे पहले भी अपराध और राजनीति का गठजोड़ सालों से प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भारी पड़ता आ रहा है। ज्यादातर सियासी कत्लों की सच्चाई दावपेंचों में फंसकर दम तोड़ देते हैं। कई राजनैतिक और वर्चस्व की रंजिशें आज भी चली आ रही है। बृजेश सिंह से पहले भी कई नाम ऐसे हैं जो जरायम की दुनिया से सत्ता के गलियारों में पहुंचे हैं।
07/03/16 22:45:36: S P R A: जय श्री काशी विश्वनाथ ऊँ नम: शिवाय हर हर महादेव
श्री विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग काशी ...........
विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगो में से एक ज्योतिर्लिंग है. यह ज्योतिर्लिंग उत्तर प्रदेश के काशी नामक स्थान में है. काशी सभी धर्म स्थलों में सबसे अधिक महत्व रखती है. सभी धर्म स्थलों में काशी का अत्यधिक महत्व कहा गया है. इस स्थान की मान्यता है, कि यह स्थान सदैव बना रहेगा. अगर कभी इस पृ्थ्वी पर किसी तरह की कोई प्रलय आती भी है, तो इसकी रक्षा के लिए भगवान शिव इस स्थान को अपने त्रिशूल पर धारण कर लेगें. और प्रलय के टल जाने पर काशी को इसके स्थान पर रख देगें.
काशी मोक्ष नगरी : धर्म शास्त्रों के अनुसार सृष्टि का प्रारम्भ भी इसी स्थान को कहा गया है. इस स्थान के विषय में एक पौराणिक कथा प्रसिद्ध है, कि सृ्ष्टि रचना के लिए भगवान विष्णु की उपासना इसी स्थान पर श्री विष्णु जी ने की थी. इसके अतिरिक्त ऋषि अगस्त्य ने इसी स्थान पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उपासना की थी. इस नगरी से कई मान्यताएं जुडी हुई है. काशी धर्म स्थल के विषय में कहा जाता है, कि इस स्थान पर जो भी व्यक्ति अंतिम सांस लेता है. उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है. इस स्थान की महिमा के विषय में जितना कहा जाए कम है. कहा जाता है. कि यहां मृ्त्यु को प्राप्त करने वाले व्यक्ति को भगवान शंकर मृ्त्युधारक के कान में मोक्ष प्राप्ति का उपदेश देते है. इस मंत्र को सुनने मात्र से पापी से पापी व्यक्ति भी भवसागर को पार कर श्री विष्णु लोक में जाता है. अधर्मी और अनाचारी भी यहां मृ्त्यु होने के बाद संसार के बंधनों से मुक्त हो गए है. प्राचीन धर्म शास्त्र मत्स्य पुराण के अनुसार काशी नगरी जप, ध्यान की नगरी है. यहां आकर व्यक्ति को उसके दु:खों से मुक्ति मिलती है. इसी पवित्र नगरी में विश्वनाथ मंदिर ज्योतिर्लिंग स्थित है. इस ज्योतिर्लिंग को विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से भी जाना जाता है. मणिककर्णिका, दशाश्वमेध, लोलार्क, बिंदूमाधव और केशवश्री विश्वनाथ धाम में ही पांच प्रमुख तीर्थ है. इसमे दशाश्वमेध, लोलार्क, बिंदूमाधव, केशव और मणिकर्णिका है. एक स्थान पर ही पांच धर्म स्थल होने के कारण इस स्थान को परमगति देने वाला स्थान कहा गया है. श्री विश्वनाथ धाम की महत्वता इसके साथ स्थित अन्य पांच तीर्थ स्थल भी बढाते है.
विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग कथा : विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के संबन्ध में एक पौराणिक कथा प्रचलित है. बात उस समय की है जब भगवान शंकर पार्वती जी से विवाह करने के बाद कैलाश पर्वत पर ही रहते थें. परन्तु पार्वती जी को यह बात अखरती थी कि, विवाह के बाद भी उन्हें अपने पिता के घर में ही रहना पडे़. इस दिन अपने मन की यह इच्छा देवी पार्वती जी ने भगवान शिव के सम्मुख रख दी. अपनी प्रिया की यह बात सुनकर भगवान शिव कैलाश पर्वत को छोड कर देवी पार्वती के साथ काशी नगरी में आकर रहने लगे. और काशी नगरी में आने के बाद भगवान शिव यहां ज्योतिर्लिंग के रुप में स्थापित हो गए. तभी से काशी नगरी में विश्वनाथ ज्योतिर्लिग ही भगवान शिव का निवास स्थान बन गया है.
विश्वनाथ ज्योतिर्लिग महत्व : काशी नगरी की वि़शेषता विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के कारण ही आज अन्य सभी धर्म स्थलों में सबसे अधिक है. जो जन इस नगरी में आकर भगवान शिव का पूजन और दर्शन करता है. उसे उसके समस्त पापों से मुक्ति मिलती है. भगवान शिव अपने भक्त की सभी पापों को स्वयं वहन करते है. और श्रद्वालु को सुख और कामना पूर्ति का आशिर्वाद देते है. भगवान शिव की नगरी कही जाने वाली काशी में स्थित पांच अन्य तीर्थ स्थल भी है. फिर भी भगवान शिव को परम सत्य, सुन्दर और परमात्मा कहा गया है. भगवान शिव सत्यम शिवम और सुंदरम है. वे ही सत्य है. वे ही ब्रह्मा है, और शिव ही शुभ होकर आत्मा के कारक है. इस जीवन में भगवान शिव और देवी पार्वती के अलावा कुछ भी अन्य जानने योग्य नहीं है. शिव ही आदि और शिव ही इस सृ्ष्टि का अंत है. जो भगवान शिव की शरण में नहीं जाता है, वह पाप और दु:ख में डूबता जाता है.
शिव धाम विश्वनाथ धाम :- शिव पुराण में श्विव के रुप का वर्णन इस प्रकार किया गया है. भगवान शिव की लम्बी लम्बी जटाएं है. भगवान शिव के हाथों में धनुष है. भगवान शिव दिगम्बर है. भगवान शिव नागराज का हार धारण किए हुए है. रुद्र की माला धारण किये हुए है. पुराणों में भगवान शिव को शंकर और महेश के नाम से उच्चारित किया गया है. अपने आधे शरीर पर राख और भभूत लगाये है. तांडव नृ्त्य करते है. और नंदी भगवान शिव का वाहन है. भगवान शिव की मुद्रा ध्यान मुद्रा है. भगवान शिव को बिल्व पत्र से पूजन करना सबसे अधिक प्रिय है. देव की प्रिया देवी पार्वती है. भगवान शिव के दो पुत्र है. इसमें एक कार्तिकेयन और दूसरे भगवान श्री गणेश है. बिल्ब पत्र के अतिरिक्त भगवान शिव को जब उनके 108 नामों से पुकारा जाता है, तब भी वे शीघ्र प्रसन्न होते है.
11/03/16 09:10:10: S P R A: ।। सुकरात का ट्रिपल फ़िल्टर टेस्ट ।।
प्राचीन यूनान में सुकरात को महाज्ञानी माना जाता था। एक दिन उनकी जान पहचान का एक व्यक्ति उनसे मिला और बोला - "क्या आप जानते हैं मैंने आपके एक दोस्त के बारे में क्या सुना ?"
"एक मिनट रुको"...
सुकरात ने कहा - "तुम्हारे कुछ बताने से पहले मैं चाहता हूँ कि तुम एक छोटा सा टेस्ट पास करो. इसे ट्रिपल फ़िल्टर टेस्ट कहते हैं।"
"ट्रिपल फ़िल्टर ?"
"हाँ, सही सुना तुमने"...
सुकरात ने बोलना जारी रखा - "इससे पहले की तुम मेरे दोस्त के बारे कुछ बताओ , अच्छा होगा कि हम कुछ समय लें और जो तुम कहने जा रहे हो उसे फ़िल्टर कर लें। इसीलिए मैं इसे ट्रिपल फ़िल्टर टेस्ट कहता हूँ।
पहला फ़िल्टर है सत्य।
क्या तुम पूरी तरह आश्वस्त हो कि जो तुम कहने जा रहे हो वो सत्य है? "
"नहीं", व्यक्ति बोला - "दरअसल मैंने ये किसी से सुना है और …."
"ठीक है" - सुकरात ने कहा - " तो तुम विश्वास के साथ नहीं कह सकते कि ये सत्य है या असत्य।
चलो अब दूसरा फ़िल्टर ट्राई करते हैं, अच्छाई का फ़िल्टर। ये बताओ कि जो बात तुम मेरे दोस्त के बारे में कहने जा रहे हो क्या वो कुछ अच्छा है ?"
"नहीं , बल्कि ये तो इसके उलट….."
"तो" - सुकरात ने कहा- " तुम मुझे कुछ बुरा बताने वाले हो , लेकिन तुम आश्वस्त नहीं हो कि वो सत्य है।
कोई बात नहीं, तुम अभी भी टेस्ट पास कर सकते हो, क्योंकि अभी भी एक फ़िल्टर बचा हुआ है: उपयोगिता का फ़िल्टर।
मेरे दोस्त के बारे में जो तू बताने वाले हो क्या वो मेरे लिए उपयोगी है?"
"हम्म्म…. नहीं, कुछ ख़ास नहीं…"
"अच्छा" - सुकरात ने अपनी बात पूरी की -
"यदि जो तुम बताने वाले हो वो ना सत्य है , ना अच्छा और ना ही उपयोगी तो उसे सुनने का क्या लाभ?" और ये कहते हुए वो अपने काम में व्यस्त हो गए।
हम सभी को भी सुखी और प्रसन्न जीवन जीने के लिए ये ट्रिपल फ़िल्टर सिद्धांत का उपयोग करना चाहिए ।
🙏🏽🙏🏽